बहराइच। लोकसभा में पास होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को राज्यसभा में पेश किया गया है। इससे पहले करीब 12 घंटे लंबी बहस और तीखी नोकझोंक के बाद विधेयक को बुधवार देर रात लोकसभा में पारित कर दिया गया। पूरे देश में वक्फ की सबसे ज्यादा जमीन उत्तर प्रदेश में है। 1.32 लाख पंजीकृत संपत्तियों में 57792 सरकारी भूमि पर कब्जा है।
यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद ने वक्फ संपत्तियों से जुड़ा डेटा जारी किया है। इस डेटा के अनुसार, यूपी में कुल 1,24,720 वक्फ संपत्तियां हैं। इनमें से 1,19,451 सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास और 5,269 शिया वक्फ बोर्ड के पास हैं। आंकड़े 2014 तक बोर्ड द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। हालाँकि इसमें हापुड़ और संभल जिले की नाम शामिल नहीं है। प्रदेश में सरकारी जमीनों पर गलत तरीके से अवैध वक्फ के मामले की जांच पिछले साल करायी गयी थी। पिछले साल संसद में पेश हुए वक्फ संशोधन विधेयक के बाद गठित हुई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) जब लखनऊ पहुंची तो यह रिपोर्ट साझा की गई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक उपयोग की भूमि और शत्रु संपत्ति पर अवैध तरीके से वक्फ बोर्ड अपना दावा कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश के 40 ऐसे जिले हैँ जिनकी सैकड़ों संपत्तियां शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड के रिकार्ड में तो दर्ज हैं नहीं, लेकिन तहसील रिकार्ड में उनका नामांतरण नहीं किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 11712 एकड़ की 57792 संपत्तियां सरकारी हैं।
लखनऊ मंडल
- लखनऊ में 3072 वक्फ संपत्तियां हैं। 2386 सुन्नी और 686 शिया वक्फ।
- उन्नाव में 1688 संपत्तियां हैं। 1647 सुन्नी और 41 शिया वक्फ।
- रायबरेली में 2875 वक्फ संपत्तियां हैं। 2758 सुन्नी और 117 शिया वक्फ।
- सीतापुर में 4204 संपत्तियां हैं। 4134 सुन्नी और 70 शिया वक्फ।
- हरदोई में 2062 संपत्तियां हैं। 2006 सुन्नी और 56 शिया वक्फ।
- लखीमपुर खीरी में 2639 संपत्तियां हैं। 2606 सुन्नी और 33 शिया वक्फ।
कानपुर मंडल
- कानपुर नगर में 1067 संपत्तियां हैं। 1004 सुन्नी और 63 शिया वक्फ।
- इटावा में 678 संपत्तियां हैं। 628 सुन्नी और 50 शिया वक्फ।
- औरैया में सभी 273 संपत्तियां सुन्नी वक्फ हैं।
- कन्नौज में 1628 वक्फ संपत्तियां हैं। 1620 सुन्नी और 8 शिया वक्फ।
- कानपुर देहात में 1881 संपत्तियां हैं। 1811 सुन्नी और 70 शिया वक्फ।
- फर्रुखाबाद में 2334 संपत्तियां हैं। 2290 सुन्नी और 44 शिया वक्फ।
अयोध्या मंडल
- अयोध्या में कुल 1501 वक्फ संपत्तियां हैं। 1315 सुन्नी वक्फ और 186 शिया वक्फ।
- अंबेडकरनगर में 1575 वक्फ हैं। 1333 सुन्नी और 242 शिया वक्फ।
- बाराबंकी में 4927 वक्फ संपत्तियां हैं। 4679 सुन्नी और 248 शिया वक्फ।
- सुल्तानपुर में 1831 संपत्तियां हैं। 1791 सुन्नी और 40 शिया वक्फ।
- अमेठी में 1013 संपत्तियां हैं। 997 सुन्नी और 16 शिया वक्फ।
प्रयागराज मंडल
- प्रयागराज में 2278 संपत्तियां हैं। 2131 सुन्नी और 147 शिया वक्फ।
- कौशांबी में 627 संपत्तियां हैं। 613 सुन्नी और 14 शिया वक्फ।
- प्रतापगढ़ में 1538 संपत्तियां हैं। 1507 सुन्नी और 31 शिया वक्फ।
- फतेहपुर में 2062 वक्फ संपत्तियां हैं। 2036 सुन्नी और 26 शिया वक्फ।
चित्रकूट मंडल
- चित्रकूट में सभी 154 संपत्तियां सुन्नी वक्फ हैं।
- बांदा में भी सभी 1139 संपत्तियां सुन्नी वक्फ हैं।
- महोबा में 237 संपत्तियां हैं। 234 सुन्नी और 3 शिया वक्फ।
- हमीरपुर में 654 संपत्तियां हैं। 653 सुन्नी और 1 शिया वक्फ।
देवीपाटन मंडल
- गोंडा में 2201 वक्फ संपत्ति हैं। 2196 सुन्नी और 5 शिया वक्फ।
- बलरामपुर में 4248 वक्फ संपत्तियां हैं। 4228 सुन्नी और 20 शिया वक्फ।
- बहराइच में 1778 वक्फ संपत्तियां हैं। 1755 सुन्नी और 23 शिया वक्फ
- श्रावस्ती में 458 संपत्तियां हैं और ये सभी सुन्नी वक्फ हैं।
बस्ती मंडल
- बस्ती में 901 संपत्तियां हैं। 898 सुन्नी और 3 शिया वक्फ।
- संतकबीरनगर में 955 वक्फ संपत्ति हैं और ये सभी सुन्नी वक्फ हैं।
- सिद्धार्थनगर में 1998 संपत्तियां हैं। 1921 सुन्नी और 77 शिया वक्फ।
गोरखपुर मंडल
- गोरखपुर में 973 वक्फ संपत्तियां हैं। 971 सुन्नी और 2 शिया वक्फ।
- देवरिया में 1854 संपत्तियां हैं और ये सभी सुन्नी वक्फ हैं।
- कुशीनगर में 660 वक्फ संपत्तियां हैं और ये सभी सुन्नी वक्फ हैं।
- महराजगंज में भी सभी 585 संपत्तियां सुन्नी वक्फ हैं।
आजमगढ़ मंडल
- आजमगढ़ में 2662 वक्फ संपत्तियां हैं। 2586 सुन्नी और 76 शिया वक्फ।
- बलिया में 1098 वक्फ संपत्तियां हैं। 1097 सुन्नी और 1 शिया वक्फ।
- मऊ में 1192 संपत्तियां हैं। 1144 सुन्नी और 48 शिया वक्फ।
वाराणसी मंडल
- वाराणसी में 1467 संपत्तियां हैं। 1346 सुन्नी और 121 शिया वक्फ।
- चंदौली में 689 संपत्तियां हैं। 655 सुन्नी और 34 शिया वक्फ।
- जौनपुर में 4135 संपत्तियां हैं। 3316 सुन्नी और 819 शिया वक्फ।
- गाजीपुर में 1664 संपत्तियां हैं। 1569 सुन्नी और 95 शिया वक्फ।
मीरजापुर मंडल
- मीरजापुर में 718 संपत्तियां हैं। 705 सुन्नी और 13 शिया वक्फ।
- भदोही में 432 संपत्तियां हैं और ये सभी सुन्नी वक्फ की हैं।
- सोनभद्र में 165 संपत्तियां हैं और ये सभी सुन्नी वक्फ की हैं।
आगरा मंडल
- आगरा में 1633 वक्फ संपत्तियां हैं। 1601 सुन्नी और 31 शिया वक्फ।
- फिरोजाबाद में 735 संपत्तियां हैं। 722 सुन्नी और 13 शिया वक्फ।
- मथुरा में 826 वक्फ हैं। 819 सुन्नी और 7 शिया वक्फ।
- मैनपुरी में 316 वक्फ संपत्तियां हैं। 314 सुन्नी और 2 शिया वक्फ।
- एटा में 688 वक्फ हैं। 685 सुन्नी और 3 शिया वक्फ।
मुरादाबाद मंडल
- मुरादाबाद में 3295 वक्फ संपत्तियां हैं। 3208 सुन्नी और 87 शिया वक्फ।
- अमरोहा में 2680 वक्फ हैं। 2421 सुन्नी और 259 शिया वक्फ।
- बिजनौर में 4697 वक्फ संपत्तियां हैं। 4414 संपत्तियां सुन्नी और 283 शिया की।
बरेली मंडल
- बरेली में 3994 वक्फ संपत्तियां हैं। 3841 सुन्नी और 103 शिया वक्फ
- बदायूं में 2190 संपत्तियां हैं। 2168 सुन्नी और 22 शिया वक्फ।
- पीलीभीत में 1174 संपत्तियां हैं। 1171 सुन्नी और 3 शिया वक्फ।
- शाहजहांपुर में 2434 संपत्तियां हैं। 2433 सुन्नी और 1 शिया वक्फ।
झांसी मंडल
- झांसी में 610 वक्फ संपत्तियां हैं। 605 सुन्नी और 5 शिया वक्फ।
- जालौन में 1046 वक्फ संपत्तियां हैं। 1042 सुन्नी और 4 शिया वक्फ।
- ललितपुर में सभी 119 संपत्तियां सुन्नी वक्फ की हैं।
मेरठ मंडल
- मेरठ में 2402 वक्फ संपत्तियां हैं। 2360 सुन्नी और 52 शिया वक्फ।
- गौतमबुद्धनगर में 575 संपत्तियां हैं। 568 सुन्नी और 7 शिया वक्फ।
- बागपत में सभी 636 संपत्तियां सुन्नी वक्फ हैं।
- बुलंदशहर में 3313 संपत्तियां हैं। 3241 सुन्नी और 72 शिया वक्फ।
- गाजियाबाद में 1356 संपत्तियां हैं। 1291 सुन्नी और 65 शिया वक्फ।
सहारनपुर मंडल
- सहारनपुर में 4851 वक्फ संपत्तियां हैं। 4682 सुन्नी और 169 शिया वक्फ।
- मुजफ्फरनगर में 3606 संपत्तियां हैं। 3147 सुन्नी और 459 शिया वक्फ।
- शामली में 1105 वक्फ संपत्तियां हैं। 1086 सुन्नी और 19 शिया वक्फ।
अलीगढ़ मंडल
- अलीगढ़ में 1400 वक्फ संपत्तियां हैं। 1358 सुन्नी और 42 शिया वक्फ।
- हाथरस में सभी 553 संपत्तियां सुन्नी वक्फ की हैं।
- कासगंज में 575 संपत्तियां हैं। 568 सुन्नी और 7 शिया वक्फ।
कानून लागू होते ही एक झटके में वक्फ के दायरे से बाहर होंगी संपत्तियां
संशोधित कानून लागू होते ही ये संपत्तियां एक झटके में वक्फ के दायरे से बाहर हो जाएंगी लेकिन स्थानीय प्रशासन को मौके पर जाकर इन पर कब्जा लेना होगा। यूपी के कई जिलों में शत्रु संपत्तियों को भी वक्फ के रूप में दर्ज कर लिया गया है, जिन्हें नियमानुसार सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद वापस लेना आसान होगा।